आगरा। सिकंदरा थाना क्षेत्र के चर्चित दहेज हत्या मामले में आगरा की स्थानीय अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पति, सास और ससुर को सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-19) लोकेश कुमार ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाता है। अदालत ने आरोपी रवि (पति), रेखा देवी (सास) और कोमल सिंह (ससुर) को सभी आरोपों से बरी करते हुए रिहा करने के आदेश दिए। यह मामला करीब तीन वर्ष चार माह तक न्यायालय में विचाराधीन रहा।
क्या था मामला
मामले के अनुसार, सिकंदरा थाना क्षेत्र के गांव रेती का नगला निवासी रवि का विवाह 8 मार्च 2018 को सोनिया के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद सोनिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसके बाद मृतका के भाई सूरज उर्फ शिशुपाल ने 12 मार्च 2023 को सिकंदरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद से सोनिया को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाता था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसकी हत्या करने के बाद शव को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया, ताकि घटना को आत्महत्या का रूप दिया जा सके।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-बी (दहेज मृत्यु), 498-ए (क्रूरता), 302/34 (हत्या) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद पति रवि, सास रेखा देवी और ससुर कोमल सिंह ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। विवेचना के दौरान पुलिस को देवर नरेश के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए उसे आरोपपत्र से बाहर कर दिया गया। बाद में उच्च न्यायालय से सास और ससुर को जमानत मिल गई, जबकि पति रवि जेल में ही रहा।
गवाहों के बयानों में सामने आए विरोधाभास
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। हालांकि जिरह के दौरान उनके बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वंशोवाबू एडवोकेट, संजय कुशवाहा एडवोकेट और दीपक वर्मा एडवोकेट ने प्रभावी पैरवी करते हुए पांच गवाह पेश किए और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
अदालत ने क्या कहा
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लोकेश कुमार ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। गवाहों के बयानों में पाए गए विरोधाभासों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाना न्यायोचित है। इसी आधार पर अदालत ने पति रवि, सास रेखा देवी और ससुर कोमल सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसके साथ ही करीब तीन साल चार महीने तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद मुख्य आरोपी रवि की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया।