ताजगंज 500 मीटर बाजार संगठन की तीखी मांग—टिकट के साथ पानी की बोतल नहीं, बंदर काटने का इंजेक्शन दीजिए; पर्यटक अपनी सुरक्षा खुद करें
आगरा। विश्व धरोहर ताजमहल में बंदरों का आतंक अब कोई नई बात नहीं रह गया है। आए दिन बंदरों के हमले, पर्यटकों से खाने-पीने का सामान छीनने और काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी स्थायी समाधान निकालने में नाकाम दिखाई दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक हर समय बंदरों के डर के साये में ताजमहल का दीदार करने को मजबूर हैं।
हाल ही में एक विदेशी पर्यटक पर बंदर के हमले के बाद एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके बावजूद अब तक न तो बंदरों के आतंक पर प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था हो सकी है और न ही पर्यटकों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर ताजगंज 500 मीटर बाजार संगठन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन का कहना है कि यदि शासन-प्रशासन बंदरों के आतंक पर रोक नहीं लगा सकता तो पर्यटकों को टिकट के साथ पानी की बोतल देने के बजाय बंदर काटने का एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन उपलब्ध करा देना चाहिए, ताकि वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें। संगठन ने इसे व्यवस्था पर व्यंग्य बताते हुए कहा कि जब खतरा रोज़ का है तो सुरक्षा के दावे केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहने चाहिए।
संगठन का कहना है कि ताजमहल देश की पहचान है और यहां हर दिन हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती तो यह पर्यटन व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। बंदरों के आतंक के कारण पर्यटकों में भय का माहौल बना रहता है, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित होती है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि कई बार शिकायतें और मांगें उठने के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने केवल आश्वासन दिए हैं। अब समय आ गया है कि बंदरों के आतंक पर स्थायी और प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि ताजमहल आने वाले पर्यटक बिना किसी भय के विश्व धरोहर का आनंद ले सकें।
ताजगंज 500 मीटर बाजार संगठन ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि ताजमहल परिसर और उसके आसपास बंदरों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि यदि अब भी गंभीरता नहीं दिखाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।