आगरा। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा स्कूली वाहनों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के विरोध में गुरुवार को 400 से अधिक स्कूल वैन चालकों ने हड़ताल कर दी। अचानक हुई इस हड़ताल से हजारों अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने और दोपहर में उन्हें लेने के लिए माता-पिता को खुद सड़क पर उतरना पड़ा। सबसे अधिक असर सेंट पीटर्स कॉलेज सहित शहर के कई बड़े स्कूलों में देखने को मिला। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा हो सकता है? आखिर जिन स्कूल वैनों में रोज मासूम बच्चे सफर करते हैं, यदि उन्हीं के पास फिटनेस, परमिट और बीमा जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
400 से ज्यादा चालान, 100 से अधिक वाहन बंद
परिवहन विभाग एक जुलाई से और यातायात पुलिस 22 जुलाई तक स्कूली वाहनों की जांच अभियान चला रही है। अब तक 400 से अधिक स्कूली वाहनों के चालान किए जा चुके हैं, जबकि 100 से अधिक वाहनों को सीज या संचालन से रोका गया है। जांच के दौरान कई ऐसे वाहन मिले जिनके पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट और बीमा तक नहीं था। कई वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
सेंट पीटर्स कॉलेज के बाहर रोज दिखती है लापरवाही
यदि सुबह स्कूल खुलने के समय कोई सेंट पीटर्स कॉलेज के बाहर कुछ देर खड़ा हो जाए तो पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। कई स्कूल वैन तेज रफ्तार में दौड़ती दिखाई देती हैं। कई चालक रॉन्ग साइड से वाहन निकालते हैं। कई वैनों में बच्चों को क्षमता से कहीं अधिक बैठाया जाता है। छोटे-छोटे बच्चों को एक-दूसरे से सटाकर ऐसे बैठाया जाता है, जैसे सामान भरा जा रहा हो। ऐसी स्थिति में यदि अचानक ब्रेक लग जाए या कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या स्कूल प्रशासन भी जिम्मेदार नहीं?
अभिभावक हर सुबह अपने बच्चों को इस भरोसे के साथ स्कूल भेजते हैं कि वे सुरक्षित घर लौटेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या स्कूल प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि जिन वैनों से बच्चे आ-जा रहे हैं, उनके पास सभी वैध दस्तावेज हैं? क्या हर वाहन की फिटनेस जांची जाती है? क्या चालक का लाइसेंस और पुलिस सत्यापन होता है? यदि नहीं, तो केवल वैन चालक ही नहीं, स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
हड़ताल अपनी जगह, लेकिन सुरक्षा से समझौता क्यों?
लोकतंत्र में विरोध और अपनी मांग रखने का अधिकार सभी को है। लेकिन यदि किसी वाहन में फिटनेस नहीं है, परमिट नहीं है, बीमा नहीं है और फिर भी वह रोज सैकड़ों बच्चों को लेकर सड़क पर दौड़ रहा है, तो उस पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है। नियमों का पालन करने के बजाय यदि कार्रवाई का विरोध किया जाए, तो इससे सबसे बड़ा नुकसान बच्चों की सुरक्षा को होता है।
क्या कहते हैं वैन चालक
स्कूल वैन चालक एसोसिएशन का कहना है कि उन पर अत्यधिक जुर्माना लगाया जा रहा है। उनकी मांग है कि पेनाल्टी माफ की जाए, बार-बार जांच न हो, परमिट संबंधी कार्यों के लिए एकल खिड़की व्यवस्था बनाई जाए और वन टाइम टैक्स की व्यवस्था में राहत दी जाए। चालकों का यह भी कहना है कि शासन द्वारा अनिवार्य किए गए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन अधिकृत एजेंसियां 10 से 12 हजार रुपये में लगा रही हैं, जबकि बाजार में यही उपकरण कम कीमत पर उपलब्ध हैं।
आरटीओ का साफ संदेश
आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी का कहना है कि सभी स्कूल वैन संचालकों को शासन के निर्देशों का पालन करना होगा। बिना परमिट वाहन नहीं चलेंगे और सभी वैनों में VLTD और पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाने होंगे। बच्चों की सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
हड़ताल से अभिभावक हुए परेशान
हड़ताल के चलते गुरुवार को सेंट पीटर्स कॉलेज सहित कई स्कूलों में अभिभावकों को खुद बच्चों को लेने पहुंचना पड़ा। अचानक वाहनों की संख्या बढ़ने से वजीरपुरा रोड समेत कई मार्गों पर लंबा जाम लग गया। कई अभिभावकों ने कहा कि यदि पहले सूचना दी जाती तो व्यवस्था बनाई जा सकती थी।
पहले भी हो चुके हैं दर्दनाक हादसे
प्रदेश में कई बार स्कूल बस और वैन हादसों में मासूम बच्चों की जान जा चुकी है। हर हादसे के बाद सख्ती के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
सबसे बड़ा सवाल…
क्या बिना फिटनेस वाली वैन में बच्चों को बैठाना सही है?
क्या बिना बीमा के सड़क पर दौड़ती स्कूल वैन सुरक्षित है?
क्या बिना परमिट वाहन चलाना नियमों का खुला उल्लंघन नहीं?
क्या स्कूल प्रशासन को हर वाहन का सत्यापन नहीं करना चाहिए?
क्या अभिभावकों को भी अपने बच्चों की वैन के दस्तावेज देखने का अधिकार नहीं है?
बच्चों की सुरक्षा किसी आंदोलन, किसी जुर्माने या किसी प्रशासनिक विवाद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
नियमों का पालन करने वाली स्कूल वैनों को कोई डर नहीं होना चाहिए, लेकिन जो वाहन बिना फिटनेस, बिना परमिट और बिना बीमा के बच्चों को ढो रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई ही मासूमों की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।