भावना एस्टेट में होगा उत्तर भारत का सबसे भव्य जनकपुरी महोत्सव, ऐतिहासिक और दिव्य आयोजन का लिया संकल्प
आगरा। उत्तर भारत के सबसे प्रतिष्ठित और भव्य धार्मिक आयोजनों में शुमार जनकपुरी महोत्सव 2026 को इस बार ऐतिहासिक, दिव्य और भव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया गया है। गुरुवार को भावना एस्टेट स्थित क्लब हाउस में जनकपुरी महोत्सव 2026 के केंद्रीय कार्यालय का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसी अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं एकेजी ग्रुप के प्रमुख अशोक कुमार गोयल को राजा जनक तथा उनकी धर्मपत्नी लता गोयल को रानी सुनयना के स्वरूप के रूप में घोषित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ हुई। जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति 2026 के अध्यक्ष राजीव कुमार (राजू यादव) ने अपनी धर्मपत्नी अनीता यादव के साथ वैदिक रीति-रिवाज से हवन सम्पन्न कराया। इसके बाद श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं आगरा दक्षिण के विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने फीता काटकर केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजन समिति की प्रथम कार्यकारिणी की घोषणा भी की गई।
भावना एस्टेट बनेगा धार्मिक आस्था और संस्कृति का केंद्र
विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि पहली बार भावना एस्टेट क्षेत्र को उत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में शामिल जनकपुरी महोत्सव की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम और माता सीता के दिव्य विवाह प्रसंग से जुड़ा यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जनकपुरी महोत्सव क्षेत्र के विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
जनकपुरी केवल आयोजन नहीं, भारतीय संस्कृति का जीवंत उत्सव
जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति 2026 के अध्यक्ष राजीव कुमार (राजू यादव) ने कहा कि जनकपुरी महोत्सव भारतीय संस्कृति, आदर्श पारिवारिक मूल्यों और सनातन परंपराओं का जीवंत उत्सव है। उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष राजा जनक की भूमिका अशोक कुमार गोयल तथा रानी सुनयना की भूमिका लता गोयल निभाएंगी। उन्होंने बताया कि शेष पदाधिकारियों की घोषणा भी जल्द की जाएगी। घोषित कार्यकारिणी में भगत सिंह बघेल, डॉ. ए.के. सिंह एवं अशोक कुमार गुप्ता को मार्गदर्शक, संतोष कटारा को मुख्य संरक्षक, संजय गोयल (पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चैंबर) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मनोज बंसल (अध्यक्ष, नेशनल चैंबर) को मुख्य संयोजक, धर्मेश जैन को मुख्य समन्वयक, अंकुश मित्तल को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, मनोज जादौन को महामंत्री, आकाश गोयल ग्वाला को कोषाध्यक्ष, राणा सुशील सिंह को मीडिया प्रभारी तथा अरविंद शर्मा को स्वागताध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
वैदेही का कन्यादान करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य
राजा जनक के स्वरूप की घोषणा होने के बाद अशोक कुमार गोयल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि माता जानकी के पिता के रूप में कन्यादान करने का अवसर मिलना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने इसे प्रभु श्रीराम और माता जानकी की असीम कृपा बताते हुए कहा कि यह उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण है। मूल रूप से रावतपाड़ा और वर्तमान में नेहरू नगर निवासी अशोक कुमार गोयल ने बताया कि उनके परिवार में दो पुत्र शोभित गोयल और मोहित गोयल, पुत्री अनुप्रिया गोयल, पुत्रवधुएं स्मृति और रिनी, तथा नाती-पोते खुश, अवंतिका, अनाया और वेदा हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी पुत्री का विवाह अभी होना बाकी है और उससे पहले माता जानकी के पिता का स्वरूप निभाने का अवसर मिलना ईश्वर की विशेष कृपा और विधाता का अद्भुत विधान है।
अनेक गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व घोषित राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल, रानी कौशल्या के स्वरूप नीता सिंघल, रजत सिंघल, निमिषा सिंघल, मोनिका जौहरी, अजय कुमार गर्ग (आवागढ़) सहित जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति और श्रीरामलीला कमेटी के अनेक पदाधिकारी एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह में राजा सिंह चौहान, जी.पी. सिंह, रामचंद्र राणा, आर.डी. सारस्वत, नीरज मिश्रा, अरुण गुप्त, दीपक माहेश्वरी, नरेंद्र शर्मा, धीरज कुमार शर्मा, लोकेंद्र कुमार संत, नरेंद्र सेंगर, अनुज, जी.पी. अग्रवाल, विश्वनाथ जुनेजा, निमित्त पोरवाल, अखिलेश दुबे, डॉ. गजेंद्र सिंह तोमर, नरेश सिंह जादौन, ऋषि खंडेलवाल, प्रभाकर शर्मा, सत्यवीर सिंह, अभिनव (शिवा) यादव, ठाकुर सतीश जादौन, क्षेत्रीय पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, साहूकार उपाध्याय, राजकुमार खत्री, डॉ. शीतल अग्रवाल, सचिन जैन, तिलक राज अरोड़ा, सुनील पाठक, डॉ. अनुराधा चौहान, भोले शंकर चौहान, बृजभूषण मिश्रा, हेमंत जादौन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जनकपुरी महोत्सव समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2026 का यह आयोजन अपनी भव्यता, दिव्यता, सांस्कृतिक गरिमा और धार्मिक आस्था के कारण आगरा ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में एक नई पहचान स्थापित करेगा।