आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में मरीजों के इलाज के बीच बाहरी लोगों की दखलंदाजी का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। नई सर्जरी बिल्डिंग स्थित अस्थि रोग विभाग के वार्ड में एक बाहरी व्यक्ति मरीजों का ₹300 लेकर ईसीजी करता हुआ दिखाई दिया। इसका 38 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया।
वीडियो में एक व्यक्ति ईसीजी मशीन से मरीज की जांच करता नजर आता है। वीडियो बनाने वाला उससे पूछता है कि वह कौन है और मरीजों से ₹300 प्रति ईसीजी क्यों वसूले जा रहे हैं। सवालों का जवाब देने के बजाय वह अपनी मशीन समेटने लगता है। वीडियो वायरल होने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने तत्काल डॉ. जी.वी. सिंह, डॉ. राजेश गुप्ता और डॉ. मनीष बंसल की तीन सदस्यीय हाईपावर जांच समिति गठित कर रिपोर्ट तलब की। जांच में मरीज के तीमारदार, डॉक्टरों और स्टाफ के बयान दर्ज किए गए। तीमारदार ने लिखित रूप से बताया कि उसने स्वयं बाहरी व्यक्ति को बुलाया था, जबकि ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने मरीज को अस्पताल की अधिकृत ईसीजी सुविधा का उपयोग करने की सलाह देने की बात कही।
जांच रिपोर्ट के आधार पर वार्ड में बाहरी व्यक्ति के ईसीजी करने को गंभीर लापरवाही मानते हुए ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर को 15 दिनों के लिए चिकित्सकीय कार्य से निलंबित कर दिया गया। वहीं संबंधित विभागाध्यक्ष (एचओडी) को कड़ी चेतावनी जारी की गई। प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसर में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सिर्फ ईसीजी ही नहीं, खून की जांच का भी खेल!
सूत्रों और पूर्व में सामने आई जानकारी के अनुसार, सर्जरी भवन में भी बाहरी लोग बैग में जांच किट लेकर मरीजों का ₹200 लेकर ब्लड टेस्ट करते देखे जाते रहे हैं। आठ मंजिला भवन में भर्ती सैकड़ों मरीजों के बीच इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से सवाल खड़े करती रही हैं। यदि यह सच है तो यह केवल एक वार्ड का मामला नहीं, बल्कि अस्पताल की निगरानी व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।
प्राचार्य का सख्त संदेश
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता की त्वरित कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा। वायरल वीडियो के बाद जांच कर दोषी पर कार्रवाई और विभागाध्यक्ष को चेतावनी देकर प्रशासन ने जवाबदेही तय करने की पहल की है। साथ ही बाहरी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस को सूचना देकर एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल में पहले से ईसीजी और जांच की अधिकृत सुविधा उपलब्ध है, तो बाहरी लोगों को वार्डों तक पहुंच आखिर किसकी लापरवाही से मिली? और क्या इस कार्रवाई के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में बाहरी लोगों का यह खेल पूरी तरह बंद हो पाएगा?
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस मामले में त्वरित, पारदर्शी और सख्त कार्रवाई कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि एसएन मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। वीडियो सामने आते ही बिना देरी के हाईपावर जांच समिति गठित की गई, दोषियों की जिम्मेदारी तय की गई, जूनियर डॉक्टर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और संबंधित विभागाध्यक्ष को भी चेतावनी जारी की गई। साथ ही बाहरी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर यह संकेत दिया गया कि अस्पताल परिसर में अनधिकृत गतिविधियों के लिए अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। यह कार्रवाई मेडिकल कॉलेज में जवाबदेही, अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक मजबूत पहल मानी जा रही है।