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नकली दवा सिंडिकेट पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार, ₹3.63 करोड़ की दवाएं जब्त; 58 थोक लाइसेंस निरस्त या निलंबित, 9 FIR दर्ज

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर FSDA की ताबड़तोड़ कार्रवाई, 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 13 फर्मों पर मारे छापे; नकली दवाओं, री-लेबलिंग और फर्जी बिलिंग का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

 

आगरा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आगरा में नकली और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के दवा सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। शहर के कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवाबिया मार्केट समेत कई इलाकों में एक साथ छापेमारी कर नकली दवाओं, री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और अस्पतालों की सप्लाई वाली दवाओं के अवैध कारोबार का खुलासा किया गया। कार्रवाई के दौरान ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली और अवैध दवाएं जब्त की गईं, 58 थोक दवा लाइसेंस निरस्त या निलंबित किए गए और पूरे सिंडिकेट के खिलाफ अब तक 9 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। एफएसडीए की इस कार्रवाई में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की संयुक्त टीम ने 13 दवा फर्मों पर एक साथ छापेमारी की। कई प्रतिष्ठानों को मौके पर ही सील कर दिया गया, जबकि 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद और भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जांच के दौरान सामने आया कि बाजार में Chymoral Forte, Shelcal, Aciloc और Telma-H जैसी चर्चित दवाओं के नकली संस्करण तैयार कर सप्लाई किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, इंसुलिन, वैक्सीन और केवल सरकारी अस्पतालों, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा ईएसआई के लिए निर्धारित दवाओं की री-लेबलिंग कर उन्हें खुले बाजार में बेचा जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार यह सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाला संगठित अपराध है। एफएसडीए की जांच में यह भी सामने आया कि प्रतिबंधित फर्मों के पुराने बिलों का इस्तेमाल कर लगभग ₹1.88 करोड़ की फर्जी बिलिंग की गई। दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

कार्रवाई के दौरान मोहन ट्रेडर्स (कम्बूटोला) और मनी मेडिकल (मुबारक महल) को सील कर दिया गया। नीलकंठ फार्मा और मनु फार्मा की दवा बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई। इससे पहले वरदान मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस 30 जनवरी 2026 को तथा हर्षित ट्रेडर्स का लाइसेंस 16 जून 2026 को निरस्त किया जा चुका था। अब तक कुल 58 थोक दवा लाइसेंस निरस्त या निलंबित किए जा चुके हैं। जांच के आधार पर कई दवा कारोबारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। विभोर मेडिकल एजेंसी के संचालक संजीव कुमार गुप्ता, वरदान मेडिकल एजेंसी के अंकुर अग्रवाल, हर्षित ट्रेडर्स की प्रियंका बंसल, गुप्ता मेडिकल एजेंसी (गोरखपुर) के अरुण कुमार गुप्ता, युग फार्मा, शारदा फार्मा, आरएमडी फार्मा, महादेव फार्मा, वी.ए. मेडिकोज, रुद्रा एंटरप्राइजेज और श्री भगवती मेडिकल एजेंसी के संचालकों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं या कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। इस पूरे सिंडिकेट की जांच में सीसीटीवी फुटेज भी अहम साक्ष्य साबित हुए। इन्हीं फुटेज के आधार पर फरार चल रहे नबील खान और सोनू बघेल को एसटीएफ गाजियाबाद ने गिरफ्तार किया। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े और कई नाम सामने आ सकते हैं।

एफएसडीए के अनुसार अब तक की कार्रवाई में करीब ₹2.50 करोड़ की इंसुलिन, वैक्सीन और डिफेंस व ईएसआई सप्लाई की दवाएं, ₹50 लाख की नकली Oxalgin DP, ₹67 लाख की अवैध दवाएं तथा ₹5.20 लाख की री-लेबलिंग की गई दवाएं बरामद की जा चुकी हैं। कुल मिलाकर ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की दवाएं जब्त की गई हैं। औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों, सप्लाई चेन और अन्य जिलों से जुड़े कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। जिन लोगों ने नकली दवाओं के जरिए आम जनता की जान से खिलवाड़ किया है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

आयुक्त ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि नकली दवाओं का कारोबार करने वाले, अस्पतालों की सप्लाई वाली दवाओं की कालाबाजारी करने वाले और अवैध वसूली या फर्जी बिलिंग में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आम जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे संगठित गिरोहों को पूरी तरह खत्म करने तक अभियान लगातार जारी रहेगा।

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