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जब नहीं मिला रक्तदाता, डॉक्टर ही बन गया जीवनदाता; हाई रिस्क डिलीवरी बनी मिसाल, मां और मासूम को मिली नई जिंदगी

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4.5 हीमोग्लोबिन और 7 हजार प्लेटलेट्स वाली गर्भवती की सफल सिजेरियन डिलीवरी, रक्तदाता नहीं मिला तो जूनियर डॉक्टर ने खुद किए प्लेटलेट्स डोनेट, मां और नवजात दोनों सुरक्षित

आगरा। सरोजिनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में चिकित्सकों ने अपनी सूझबूझ, त्वरित निर्णय क्षमता और टीमवर्क से एक बेहद जटिल हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का सफल इलाज कर मानवता की मिसाल पेश की। गंभीर एनीमिया, अत्यंत कम प्लेटलेट्स और ऑब्स्ट्रक्टेड लेबर जैसी जानलेवा स्थिति में भर्ती गर्भवती महिला की सफल सिजेरियन डिलीवरी कराई गई। सबसे भावुक पहलू यह रहा कि समय पर प्लेटलेट्स उपलब्ध न होने पर एक जूनियर डॉक्टर ने स्वयं प्लेटलेट्स दान कर मां और बच्चे की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।

मेडिकल कॉलेज के अनुसार, गर्भवती महिला को ऑब्स्ट्रक्टेड लेबर, गंभीर एनीमिया (हीमोग्लोबिन मात्र 4.5 ग्राम/डेसीलीटर) और सिर्फ 7,000 प्लेटलेट्स प्रति माइक्रोलिटर जैसी अत्यंत गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था। मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी और तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन करना जरूरी था। लेकिन उस समय पर्याप्त रक्त और प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं थे तथा मरीज के साथ कोई रक्तदाता भी मौजूद नहीं था।

ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. पियूष ने सेवा भावना और मानवता का परिचय देते हुए स्वयं प्लेटलेट्स दान किए। उनके इस कदम से बिना किसी देरी के ऑपरेशन संभव हो सका। इसके बाद डॉ. साताक्षी, डॉ. गीतिका, डॉ. आयुषी और डॉ. अंशु गौतम की टीम ने आपातकालीन सिजेरियन डिलीवरी सफलतापूर्वक संपन्न कराई। पूरे उपचार के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह, डॉ. उर्वशी, डॉ. दिव्या यादव, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. अमृता, ब्लड बैंक की टीम और नर्सिंग स्टाफ ने समन्वित रूप से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों की त्वरित कार्यशैली, बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रयासों का परिणाम रहा कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। दोनों की विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में देखभाल की जा रही है और उनकी स्थिति लगातार बेहतर बताई जा रही है।

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता चिकित्सकों की दक्षता, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गंभीर परिस्थितियों में भी एसएन मेडिकल कॉलेज की टीम मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रही है।

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