आगरा। आईएसबीटी कट पर एक बार फिर दर्दनाक सड़क हादसे ने दो जिंदगियां छीन लीं। शुक्रवार शाम तेज रफ्तार कंटेनर ट्रक की चपेट में आने से बाइक सवार पति-पत्नी की मौत हो गई। हादसे के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया और एक बार फिर आईएसबीटी कट की ट्रैफिक व्यवस्था तथा सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 6:15 बजे आईएसबीटी फ्लाईओवर से नीचे उतरते समय एक कंटेनर ट्रक ने आगे चल रही बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक ट्रक के पहियों के नीचे आ गई। हादसे में बाइक पर सवार पूजा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति अजय, निवासी सिकंदरा, गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें तत्काल एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात सुचारु कराने का प्रयास किया, लेकिन लॉयर्स कॉलोनी से लेकर आईएसबीटी कट तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम से बचने के लिए लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। यह कोई पहला हादसा नहीं है। आईएसबीटी कट लंबे समय से सड़क हादसों का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां अक्सर रोडवेज बसें सड़क किनारे खड़ी रहती हैं, जिससे हाईवे का बड़ा हिस्सा घिर जाता है। फ्लाईओवर से उतरने वाले वाहनों की रफ्तार अधिक होने और सड़क पर पर्याप्त जगह न मिलने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
प्रशासन समय-समय पर अतिक्रमण और अव्यवस्थित बसों के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन हालात जल्द ही फिर पहले जैसे हो जाते हैं। इसी लापरवाही की कीमत अब एक और परिवार को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आईएसबीटी कट पर लगातार हो रहे हादसों के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा? यदि यहां बसों की अवैध पार्किंग पर प्रभावी रोक, ट्रैफिक प्रबंधन और हाईवे पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित की जाती, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।
अब लोगों की मांग है कि आईएसबीटी कट को दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित कर यहां स्थायी ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाए, रोडवेज बसों की अनियंत्रित पार्किंग पर सख्त रोक लगे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।