ग्राउंड रिपोर्ट: जितेंद्र कुशवाह
आगरा/खंदौली। सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन खंदौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की हकीकत उन दावों की पोल खोलती नजर आई। देर रात मारपीट में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को उपचार के लिए सीएचसी लाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। घायल के मुंह और नाक से लगातार खून बहता रहा, जबकि परिजन डॉक्टर की तलाश में अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घायल दर्द से कराहता रहा, लेकिन काफी देर तक उसे प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल सका। परिजनों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज के साथ ऐसी स्थिति हो जाए तो उसकी जान भी जा सकती है। उनका आरोप है कि अस्पताल में समय पर डॉक्टर की उपलब्धता न होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। रात के समय सीएचसी में डॉक्टरों के न मिलने की शिकायतें पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं, लेकिन व्यवस्था में अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ही रात के समय मरीजों को डॉक्टर नहीं मिलेंगे तो आम जनता आपातकाल में आखिर किसके भरोसे रहे? लोगों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों को बुनियादी इलाज तक समय पर नहीं मिल पा रहा।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार डॉक्टरों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सीएचसी खंदौली में 24 घंटे चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इलाज के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े। स्वास्थ्य विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।