आगरा। रात जैसे-जैसे गहराने लगती, शहर की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगती। दिनभर की भागदौड़ के बाद लोग अपने-अपने घर लौटने की जल्दी में होते। बाजारों की रौनक कम होने लगती, दुकानों के शटर गिरने लगते और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी धीरे-धीरे कम हो जाती। बिजलीघर चौराहे पर कई लोग अपने गांव या घर जाने के लिए किसी वाहन का इंतजार कर रहे होते। किसी को परिवार की चिंता होती, तो किसी को देर रात घर पहुंचने की जल्दबाजी। तभी अचानक एक चमचमाती महिंद्रा थार या महिंद्रा स्कॉर्पियो धीरे-धीरे आकर उनके सामने रुकती। गाड़ी के अंदर बैठे युवक बेहद सभ्य और भरोसा दिलाने वाले अंदाज में कहते— “आ जाइए भाई… रास्ते में ही छोड़ देंगे।” रात के समय सुनसान होती सड़क पर यह आवाज किसी मदद से कम नहीं लगती थी। अनजान राहगीर इसे इंसानियत समझते, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह मदद नहीं, बल्कि लूट की एक सुनियोजित साजिश का पहला कदम है।
जैसे ही कोई पीड़ित गाड़ी में बैठता, उसका सफर शुरू हो जाता। शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल सामान्य दिखाई देता। गाड़ी में बैठे युवक हंसी-मजाक करते, रास्ते की बातें करते और ऐसा माहौल बनाते कि सामने वाले को जरा भी शक न हो। लेकिन कुछ ही मिनटों बाद गाड़ी अचानक शहर की रोशनी छोड़कर सुनसान रास्तों की ओर मुड़ जाती। अब चारों तरफ अंधेरा, वीरानी और सन्नाटा होता। तभी अचानक गाड़ी रुकती। जो चेहरे कुछ देर पहले मुस्कुरा रहे थे, वही चेहरे पल भर में खौफ का रूप ले लेते। पीड़ित को धमकाया जाता, जेबें टटोली जातीं, मोबाइल फोन छीन लिए जाते, नकदी निकाल ली जाती, उंगलियों से अंगूठियां उतरवा ली जातीं और कानों से सोने की बालियां तक नहीं छोड़ी जातीं। विरोध करने की जरा-सी कोशिश पर जान से मारने की धमकी दी जाती। जब बदमाशों को यकीन हो जाता कि अब पीड़ित उनके खिलाफ कुछ नहीं कर पाएगा, तो उसे अंधेरी सड़क पर अकेला उतारकर तेज रफ्तार से फरार हो जाते। पीछे रह जाता था सिर्फ डर, बेबसी और पुलिस तक पहुंचने की मजबूरी।
पहली वारदात… 24 जुलाई की रात
गैंग ने अपना पहला शिकार 24 जुलाई की रात बनाया। पीड़ित बिजलीघर चौराहे पर अपने गांव जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहा था। काफी देर तक कोई साधन नहीं मिला तो तभी स्कॉर्पियो में सवार कुछ युवक उसके पास आए और बोले कि वे भी उसी दिशा में जा रहे हैं। भरोसा दिलाते हुए उन्होंने युवक को गाड़ी में बैठा लिया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन जैसे ही गाड़ी शमशाबाद थाना क्षेत्र के सिक्तरा गांव के पास सुनसान इलाके में पहुंची, बदमाशों ने अपना असली चेहरा दिखा दिया। उन्होंने युवक से ₹10 हजार नकद, सोने की कान की बाली, चांदी का हाथ का कड़ा और दो मोबाइल फोन लूट लिए। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश उसे सड़क किनारे उतारकर फरार हो गए। कुछ देर तक युवक सदमे में वहीं खड़ा रहा और फिर किसी तरह पुलिस तक पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी दी।
दूसरी रात… वही तरीका… नया शिकार
पहली लूट की गुत्थी पुलिस पूरी तरह सुलझा भी नहीं पाई थी कि अगले ही दिन 25 जुलाई को गैंग ने उसी अंदाज में दूसरी वारदात कर डाली। इस बार भी बिजलीघर चौराहे पर घर लौटने का इंतजार कर रहे एक युवक को महिंद्रा थार में बैठाया गया। रास्ते भर बातचीत का सिलसिला चलता रहा ताकि उसे किसी तरह का संदेह न हो। लेकिन जैसे ही गाड़ी बमरौली कटारा थाना क्षेत्र के समोगर गांव जाने वाले सुनसान मार्ग पर पहुंची, बदमाशों ने अचानक उसे घेर लिया। युवक से ₹1,500 नकद और सोने की एक अंगूठी लूट ली गई। इसके बाद उसे बीच रास्ते में उतार दिया गया और बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। लगातार दो दिनों में एक जैसी वारदातों ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। अब साफ हो चुका था कि यह किसी एक बदमाश का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गैंग का खेल है।
फिर शुरू हुआ पुलिस का ‘ऑपरेशन शिकंजा’
दोनों घटनाओं के बाद आगरा पुलिस पूरी तरह अलर्ट हो गई। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त पूर्वी जोन के नेतृत्व में शमशाबाद और बमरौली कटारा थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया। संदिग्ध वाहनों की जानकारी जुटाई गई। कई स्थानों पर देर रात तक चेकिंग अभियान चलाया गया और हर उस वाहन पर नजर रखी गई जो पुलिस को संदिग्ध लग रहा था। लगातार जुटाए जा रहे सुराग आखिरकार पुलिस को सही दिशा तक ले गए।
आखिरकार पुलिस के जाल में फंसे शातिर
कृष्णा धाम कॉलोनी के सामने पुलिस को वही संदिग्ध थार और स्कॉर्पियो दिखाई दी, जिनकी तलाश पिछले दो दिनों से की जा रही थी। पुलिस ने बिना देर किए चारों तरफ से घेराबंदी कर दी। बदमाशों ने बच निकलने की कोशिश की, लेकिन इस बार उनकी हर चाल नाकाम रही। कुछ ही देर में चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में थे। पूछताछ में उनकी पहचान करन जादौन, सूरज तोमर, विवेक कुशवाह और दीपेश के रूप में हुई। पुलिस ने जब उनकी तलाशी ली तो कई ऐसे सामान बरामद हुए, जिन्होंने पूरी वारदात की परतें खोलकर रख दीं।
बरामदगी ने खोले कई राज
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹5 हजार नकद, सोने की अंगूठी, एक जोड़ी सोने की कान की लर, नाक की सोने की बाली, चार मोबाइल फोन, 315 बोर का अवैध तमंचा, एक जिंदा कारतूस तथा वारदात में इस्तेमाल की गई महिंद्रा स्कॉर्पियो और महिंद्रा थार बरामद की। पूछताछ में यह भी सामने आया कि दोनों गाड़ियां आरोपियों की अपनी नहीं थीं, बल्कि किराये पर ली जाती थीं ताकि किसी को उन पर आसानी से शक न हो और वारदात के बाद पहचान छिपाई जा सके। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल किन-किन घटनाओं में किया गया।
अब खुलेंगे और भी राज!
पुलिस का मानना है कि यह गैंग सिर्फ दो वारदातों तक सीमित नहीं हो सकता। इसलिए चारों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने आगरा या आसपास के अन्य थाना क्षेत्रों में भी इसी तरह की कितनी लूट की घटनाओं को अंजाम दिया है। साथ ही चारों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है, जिससे उनके पुराने मामलों की कड़ियां भी जोड़ी जा सकें। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल… ‘लिफ्ट’ के नाम पर रात के अंधेरे में लोगों को अपना शिकार बनाने वाला ‘थार-स्कॉर्पियो गैंग’ सलाखों के पीछे है। लेकिन यह पूरा मामला एक बार फिर लोगों को सावधान करता है कि देर रात किसी अनजान वाहन में सिर्फ “रास्ते में छोड़ देंगे” सुनकर बैठ जाना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
आगरा पुलिस ने 48 घंटे के भीतर इस हाई-प्रोफाइल गैंग का पर्दाफाश कर न सिर्फ दो सनसनीखेज लूट की वारदातों का खुलासा किया, बल्कि शहर में दहशत फैलाने वाले इस गिरोह के खेल पर भी बड़ा विराम लगा दिया। हालांकि जांच अभी जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस गैंग से जुड़े कई और राज भी सामने आ सकते हैं।