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प्रेम संबंध बना पति की मौत की वजह! आगरा के चर्चित कारोबारी नरेश हत्याकांड में पत्नी, प्रेमी और देवर को उम्रकैद

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बेटी की गवाही, खून के निशान और कॉल डिटेल बने अहम साक्ष्य; पांच साल पुराने सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला

आगरा। रिश्तों के विश्वास को झकझोर देने वाले आगरा के चर्चित कारोबारी नरेश कुमार हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) शिव कुमार ने नरेश की पत्नी प्रमिता उर्फ प्रेमिता, उसके कथित प्रेमी रविकांत राजपूत और रविकांत के भाई शशिकांत राजपूत को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। करीब पांच साल तक चली सुनवाई के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर अवैध प्रेम संबंधों की कीमत कई परिवारों को अपनी जान देकर क्यों चुकानी पड़ रही है।

यह मामला 8 जून 2021 का है। सिद्धार्थनगर निवासी सुरेश चंद ने थाना ताजगंज में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि सुबह उन्हें फोन पर सूचना मिली कि उनके बेटे नरेश कुमार की हत्या कर दी गई है। जब परिवार मौके पर पहुंचा तो निखिल होम्स के पीछे खाली प्लॉट में नरेश का शव बोरे में बंधा मिला। नरेश शहर के जाने-माने जूता कारोबारी थे। घटना ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी।

जांच में खुली साजिश की परतें

पुलिस जांच के दौरान मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश का निकला। विवेचना में नरेश की पत्नी प्रमिता, उसके कथित प्रेमी रविकांत राजपूत और उसके भाई शशिकांत राजपूत की भूमिका सामने आई। इसके बाद तीनों के खिलाफ हत्या सहित एससी/एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं। जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल, सीडीआर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन पड़ताल की। घटनास्थल से कमरे की दीवारों और फर्श पर खून के धब्बे मिले। कमरे का सामान अस्त-व्यस्त था और खून से सनी ईंट भी बरामद हुई। पुलिस को घटनास्थल के पास एक बोरा भी मिला, जिसमें शव को ठिकाने लगाने के प्रयास के संकेत मिले।

10 साल की बेटी बनी सबसे बड़ी गवाह

इस मुकदमे का सबसे अहम पहलू नरेश की बड़ी बेटी की गवाही रही। घटना के समय उसकी उम्र करीब 10 वर्ष थी। अदालत में उसने बताया कि घटना वाली रात उसकी मां ने तीनों भाई-बहनों को कमरे में बंद कर दिया था। उन्हें कोल्ड ड्रिंक दी गई और टीवी की आवाज तेज कर दी गई। देर रात जब उसकी आंख खुली और उसने दरवाजा खोलने को कहा, तो पहले दरवाजा नहीं खोला गया। बाद में जब दरवाजा खुला तो उसने कमरे में बेड पर खून के धब्बे देखे। उसने यह भी बताया कि उसकी मां ने रात में स्नान किया था। अदालत ने इस गवाही को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। मामले में कुल 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच, कॉल डिटेल और प्रत्यक्ष परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

रिश्तों पर बड़ा सवाल

नरेश हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक गंभीर सवाल भी है। बीते कुछ वर्षों में प्रेम संबंधों और विवाहेतर संबंधों को लेकर पति या पत्नी की हत्या के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों में अक्सर पूरा परिवार बिखर जाता है और सबसे बड़ा दंश उन मासूम बच्चों को झेलना पड़ता है, जो माता-पिता के संघर्ष और अपराध के बीच अपना बचपन खो देते हैं। हालांकि, हर वैवाहिक विवाद या विवाहेतर संबंध अपराध में नहीं बदलता और किसी एक मामले के आधार पर व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। लेकिन यह मामला दिखाता है कि जब रिश्तों में संवाद की जगह हिंसा और साजिश ले लेती है, तो उसका अंत पूरे परिवार के लिए विनाशकारी हो सकता है।

आगरा के इस बहुचर्चित मामले में अदालत का फैसला पांच साल बाद आया है, लेकिन इसने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रिश्तों में विश्वास टूटने की कीमत आखिर कितनी भयावह हो सकती है।

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