आगरा। साइबर ठगी के लगातार बदलते हथकंडों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आगरा कमिश्नरेट ने तकनीक और जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पुलिस लाइन स्थित शहीद प्रशांत मेमोरियल सभागार में आयोजित साइबर जागरूकता कार्यशाला में देश के प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराधियों के नए-नए तरीकों से अवगत कराया।
कार्यशाला में बताया गया कि आज साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर, सोशल मीडिया हैकिंग, एआई आधारित डीपफेक, वॉइस क्लोनिंग, नकली एपीके फाइल, क्यूआर कोड स्कैम और स्क्रीन शेयरिंग एप के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे अपराधों से निपटने के लिए पुलिस का तकनीकी रूप से अपडेट रहना बेहद आवश्यक है।
रक्षित टंडन ने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती ‘गोल्डन आवर’ सबसे अहम होता है। पीड़ित यदि तुरंत शिकायत दर्ज कराए तो ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और त्वरित कार्रवाई के महत्व पर भी जोर दिया।
कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को आम जनता को जागरूक करने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया। उन्हें सलाह दी गई कि लोग किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, सीवीवी या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी साझा न करें, अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, संदिग्ध मोबाइल एप डाउनलोड न करें और सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत रखें।
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार (आईपीएस) ने कहा कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती बन चुके हैं। अपराधी पढ़े-लिखे और जागरूक लोगों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और साइबर हेल्प डेस्क के माध्यम से लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताए जाएं और किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाए।
पुलिस आयुक्त ने कहा, “जागरूक नागरिक ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं।” कार्यशाला में प्रभारी पुलिस उपायुक्त पश्चिमी एवं साइबर अपराध के नोडल अधिकारी आदित्य कुमार, अपर पुलिस उपायुक्त यातायात अलका, सहायक पुलिस आयुक्त हरीपर्वत अमीषा, साइबर थाना और साइबर सेल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। कमिश्नरेट के सभी थानों की साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात पुलिसकर्मी भी ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला से जुड़े।