ग्रामीणों का आरोप—बार-बार सूचना देने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, समय पर इलाज न मिलने से बिगड़ी हालत, घावों में पड़े कीड़े
आगरा। खंदौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत सेमरा में एक घायल बंदर की पीड़ा ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जल निगम की पानी की टंकी में फंसकर गंभीर रूप से घायल हुए बंदर की सूचना कई बार वन विभाग को दी गई, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और न ही उसे विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया गया। समय पर इलाज नहीं मिलने से घायल बंदर की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उसके घावों में कीड़े पड़ने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, भीषण गर्मी और प्यास के कारण बंदर पानी पीने के लिए जल निगम की बड़ी टंकी के अंदर घुस गया था। इसी दौरान टंकी का भारी ढक्कन बंद हो गया, जिससे उसके दोनों पैर बुरी तरह दब गए। दर्द से तड़पते बंदर की चीखें सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला। बाहर निकालने पर उसके दोनों पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मिले।
ग्रामीणों और स्थानीय समाजसेवियों ने अपने स्तर पर उसका उपचार कराने का प्रयास किया, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि इस बीच कई बार वन विभाग के अधिकारियों को फोन कर घटना की जानकारी दी गई और घायल वन्यजीव को रेस्क्यू कर उपचार के लिए ले जाने की मांग की गई। आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन मिला, लेकिन मौके पर कोई टीम नहीं पहुंची।
ग्रामीणों का कहना है कि विशेषज्ञ इलाज के अभाव में बंदर की स्थिति लगातार बिगड़ती रही। अब उसके घावों में कीड़े पड़ चुके हैं और वह असहनीय पीड़ा से गुजर रहा है। इस स्थिति ने ग्रामीणों में नाराजगी पैदा कर दी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते विभाग कार्रवाई करता तो घायल वन्यजीव को बेहतर इलाज मिल सकता था।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर तत्काल विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम भेजने, घायल बंदर को वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती कराने तथा मामले में लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित उपचार नहीं मिला और बेजुबान वन्यजीव की जान चली गई तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।