फिरोजाबाद। डेढ़ साल के मासूम को बेरहमी से सड़क पर पटक-पटक कर मौत के घाट उतारने वाले विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जिला अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। सबसे बड़ी बात यह रही कि इस जघन्य हत्याकांड का फैसला महज 40 दिनों में आ गया, जो अपने आप में एक मिसाल माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे जिस पुलिस अधिकारी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह हैं इंस्पेक्टर अनुज राणा। उन्होंने इस केस को केवल दर्ज ही नहीं किया, बल्कि इंसाफ की आखिरी सीढ़ी तक मजबूती से पहुंचाया।
एक भी तारीख नहीं छोड़ी… एक भी सबूत कमजोर नहीं पड़ने दिया।
हर सुनवाई में खुद मौजूद रहे, हर गवाह, हर दस्तावेज और हर साक्ष्य पर पैनी नजर रखी। उनकी मजबूत पैरवी और सटीक विवेचना ने अदालत के सामने ऐसा केस रखा कि मासूम के हत्यारे को आखिरकार फांसी की सजा सुनाई गई।
यह फैसला केवल एक अपराधी को सजा नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि मासूमों के हत्यारों के लिए कानून अब तेजी से फैसला सुनाने की क्षमता रखता है।
इंस्पेक्टर अनुज राणा की मेहनत, कानून पर भरोसा और न्याय के प्रति समर्पण ने यह साबित कर दिया कि जब जांच मजबूत हो, तो इंसाफ में देर नहीं होती।
यह फैसला अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है और आम जनता के लिए भरोसे की नई उम्मीद।