15 साल पुरानी बाइक सड़क पर चलाने पर चालान, लेकिन उसी बाइक से बनी जुगाड़ गाड़ियां बेखौफ दौड़ रहीं; बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा?
आगरा। शहर की सड़कों पर इन दिनों बड़ी संख्या में बाइक से तैयार की गई अवैध जुगाड़ गाड़ियां बेधड़क दौड़ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि एक ओर ट्रैफिक पुलिस 15 साल पुरानी बाइक और अन्य नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं बाइकों को काट-छांटकर बनाई गई जुगाड़ गाड़ियां खुलेआम सड़कों पर दौड़ रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन वाहनों की जांच कौन करता है और यदि कल कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
शहर के कई इलाकों में ऐसी जुगाड़ गाड़ियों से लोहे का भारी-भरकम कबाड़ और अन्य सामान ढोया जा रहा है। इन वाहनों का न तो कोई पंजीकरण स्पष्ट होता है, न फिटनेस, न बीमा और न ही सुरक्षा मानकों का पालन। इसके बावजूद ये मुख्य मार्गों से लेकर व्यस्त बाजारों तक बिना किसी रोक-टोक के दौड़ती नजर आती हैं। हाल ही में चोरी की एक बाइक को जुगाड़ गाड़ी में बदलने का मामला सामने आने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर कितनी चोरी की बाइकों का स्वरूप बदलकर उन्हें सड़कों पर उतार दिया जाता है? क्या ऐसे वाहनों की कभी जांच की जाती है? यदि होती है तो फिर ये बिना किसी कार्रवाई के कैसे चल रहे हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी दोपहिया वाहन के ढांचे में इस तरह का बदलाव मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हो सकता है और ऐसे वाहन सड़क पर चलने के लिए अधिकृत नहीं होते। इसके बावजूद शहर में इनकी संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये जुगाड़ गाड़ियां अक्सर क्षमता से अधिक वजन लेकर चलती हैं। कई बार इनमें न तो उचित ब्रेक व्यवस्था होती है और न ही पर्याप्त लाइट या सुरक्षा संकेतक। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यदि किसी राहगीर या वाहन चालक की जान चली गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
अब सवाल सिर्फ चोरी की बाइक का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की निगरानी पर है। जब ट्रैफिक पुलिस छोटे-छोटे नियमों के उल्लंघन पर चालान काट सकती है, तो अवैध रूप से संशोधित इन जुगाड़ गाड़ियों के खिलाफ अभियान क्यों नहीं चलाया जाता?
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? शहरवासियों ने परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि शहर में चल रही सभी अवैध जुगाड़ गाड़ियों का विशेष अभियान चलाकर सत्यापन कराया जाए। जिन वाहनों के पास वैध दस्तावेज, फिटनेस या कानूनी अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसी संभावित हादसे से पहले व्यवस्था जाग सके।