आगरा। एत्मादपुर तहसील क्षेत्र में सरकारी नियमों को ठेंगा दिखाते हुए सड़क किनारे लगे दिशा-सूचक और चेतावनी संकेतक बोर्डों पर एक बार फिर बड़े-बड़े बैनर चस्पा कर दिए गए हैं। आरोप है कि जनहित के लिए लगाए गए इन बोर्डों को राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रचार का माध्यम बना दिया गया है। इससे न केवल सड़क सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग पर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन संकेतक बोर्डों का उद्देश्य वाहन चालकों को मार्ग, मोड़ और संभावित खतरों की जानकारी देना है, वे अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों के प्रचार-प्रसार के पोस्टरों से पूरी तरह ढक गए हैं। ऐसे में वाहन चालकों को आवश्यक संकेत दिखाई नहीं दे रहे, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे बैनर लगाए गए थे, जिन्हें काफी समय बाद हटाया गया था। अब फिर उन्हीं स्थानों पर नए बैनर लगा दिए गए हैं। इससे साफ है कि सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वालों में कार्रवाई का कोई डर नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई आम नागरिक सरकारी संपत्ति पर पोस्टर या बैनर लगाए तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो जाती है, लेकिन जब प्रभावशाली लोगों की बात आती है तो संबंधित विभाग आंखें मूंद लेता है। लोगों का कहना है कि “जनता के लिए बने संकेतक अब नेताओं के प्रचार का बोर्ड बनकर रह गए हैं।”
सबसे बड़ा सवाल लोक निर्माण विभाग (PWD) की भूमिका पर उठ रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि विभाग के अधिकारियों को कई बार इस संबंध में जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह संदेश जा रहा है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे और प्रचार सामग्री लगाने वालों को खुली छूट मिली हुई है। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और पीडब्ल्यूडी से मांग की है कि सड़क संकेतक बोर्डों से तत्काल सभी अवैध बैनर हटाए जाएं और सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ बिना भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा किसी भी राजनीतिक प्रचार से अधिक महत्वपूर्ण है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।