आगरा। मथुरा जनपद के राया-अलीगढ़ मार्ग पर शुक्रवार को हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे आगरा मंडल को झकझोर दिया। स्कूल बस और ट्रैक्टर-ट्रॉली की आमने-सामने की भिड़ंत में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि स्कूल बस में सवार सभी बच्चे सुरक्षित रहे, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि स्कूलों के आसपास यातायात प्रबंधन में जरा-सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। मथुरा की इस घटना के बाद आगरा के संवेदनशील स्कूल मार्गों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विशेष रूप से सेंट पीटर्स कॉलेज रोड, जहां प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं, अभिभावक, स्कूल बसें, वैन, ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य वाहन गुजरते हैं। सुबह स्कूल खुलने और दोपहर छुट्टी के समय यह मार्ग सबसे अधिक व्यस्त रहता है। ऐसे में थोड़ी-सी अव्यवस्था भी किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। इसी खतरे को देखते हुए Agra News Network ने पिछले कई दिनों से लगातार इस मार्ग की वास्तविक स्थिति को प्रमुखता से उठाया। खबरों के माध्यम से यह सवाल किया गया कि जब इस सड़क पर कई बड़े शिक्षण संस्थान मौजूद हैं, तो स्कूल समय में ट्रैफिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत क्यों नहीं बनाया जा रहा। समाचारों में यह भी मांग उठाई गई कि स्कूल समय के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाई जाए और ट्रैफिक पुलिस के साथ स्थानीय थाना पुलिस की भी नियमित मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
लगातार प्रकाशित खबरों और जनहित में उठाई गई मांगों के बाद उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद अब सेंट पीटर्स कॉलेज रोड पर स्कूल समय में ट्रैफिक पुलिस की सक्रिय तैनाती देखने को मिल रही है। ट्रैफिक पुलिस वाहनों का संचालन सुचारु करा रही है, स्कूल बसों और अन्य वाहनों की निगरानी कर रही है तथा यातायात को व्यवस्थित बनाए रखने का प्रयास कर रही है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे बच्चों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
हालांकि लोगों का कहना है कि अभी भी एक महत्वपूर्ण कमी बनी हुई है। पालीवाल पार्क गेट के पास बनाया गया पुलिस बूथ आज भी नियमित पुलिस तैनाती का इंतजार कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस बूथ का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करना था, लेकिन यहां स्थायी रूप से पुलिसकर्मियों की तैनाती न होने के कारण यह अपनी पूरी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और दोपहर स्कूल समय में यदि इस बूथ पर पुलिसकर्मी नियमित रूप से मौजूद रहें तो ट्रैफिक नियंत्रण और कानून-व्यवस्था दोनों को और मजबूती मिलेगी। इससे किसी भी विवाद, दुर्घटना या आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव होगी और छात्रों की सुरक्षा का स्तर भी बढ़ेगा। क्षेत्रवासियों ने यह भी मांग की है कि स्कूल समय में भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्ती से रोक लगाई जाए। कई बार बड़े ट्रक, डंपर और अन्य भारी वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं, जिससे स्कूल बसों, वैन और पैदल आने-जाने वाले बच्चों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ट्रैफिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि संवेदनशील स्कूल जोन में समयबद्ध ट्रैफिक प्लान लागू करना अत्यंत आवश्यक है।
मथुरा की घटना इस बात का उदाहरण है कि एक छोटी-सी चूक कितनी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। यदि समय रहते प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन और पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए तो ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। आगरा में ट्रैफिक पुलिस की सक्रिय तैनाती निश्चित रूप से एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन अब आवश्यकता है कि इस व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। पालीवाल पार्क गेट स्थित पुलिस बूथ को तत्काल सक्रिय कर वहां नियमित पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाए, स्कूल समय में ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय थाना पुलिस संयुक्त रूप से ड्यूटी करें तथा भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण लागू किया जाए।
सड़क सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि हजारों स्कूली बच्चों के जीवन और उनके भविष्य से जुड़ा मामला है। समय रहते उठाया गया प्रत्येक कदम किसी बड़े हादसे को टाल सकता है। मथुरा की घटना एक चेतावनी है और आगरा के लिए यह अवसर भी कि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत कर लिया जाए।