आगरा। करीब नौ महीने तक पूरे शहर को झकझोर देने वाले चर्चित गोल्डी अपहरण कांड में आखिरकार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी शोएब को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत मजबूत साक्ष्यों, प्रभावी विवेचना और अभियोजन की पैरवी को आधार बनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली और पूरे मामले में ताजगंज पुलिस की कार्रवाई की सराहना की जा रही है। यह मामला अक्टूबर 2025 का है, जब थाना ताजगंज क्षेत्र की पुरानी मंडी में रहने वाली चार वर्षीय मासूम गोल्डी अपने दादा के साथ घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी शोएब मासूम को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। बच्ची के अचानक लापता होने से परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही थाना ताजगंज पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें आरोपी शोएब मासूम गोल्डी का हाथ पकड़कर ले जाता हुआ स्पष्ट दिखाई दिया। यही फुटेज जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस के सामने यह तथ्य भी आया कि अपहरण के पीछे बच्ची को बेचने अथवा मानव तस्करी के उद्देश्य से साजिश रची गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगरा पुलिस ने दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया। संयुक्त कार्रवाई के दौरान दिल्ली से मासूम गोल्डी को सकुशल बरामद कर लिया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
विवेचना के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान तथा अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को वैज्ञानिक ढंग से संकलित कर न्यायालय में मजबूत चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने भी अदालत में प्रभावी पैरवी करते हुए घटना से जुड़े सभी तथ्यों को मजबूती से रखा। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी शोएब को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को मासूम बच्ची और उसके परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में थाना ताजगंज की पुलिस टीम की भूमिका की भी व्यापक सराहना हो रही है। विशेष रूप से उ0नि0 अमित धामा द्वारा की गई निष्पक्ष एवं गहन विवेचना, सशक्त चार्जशीट और साक्ष्यों की प्रभावी प्रस्तुति को इस दोषसिद्धि का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर जांच के चलते आरोपी को त्वरित सजा दिलाने में सफलता मिली।
मामले के फैसले के बाद स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी ताजगंज पुलिस की सराहना की। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित जांच, मजबूत विवेचना और प्रभावी पैरवी से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है, बल्कि समाज में यह संदेश भी जाता है कि मासूमों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून से बचने का कोई अवसर नहीं मिलेगा। चार वर्षीय मासूम गोल्डी की सकुशल बरामदगी से शुरू हुई उम्मीद आज न्यायालय के फैसले के साथ न्याय में बदल गई। यह फैसला उन सभी अपराधियों के लिए भी कड़ा संदेश है, जो बच्चों के अपहरण और मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों में शामिल होते हैं।