संपूर्ण समाधान दिवस में गूंजे अवैध कब्जे, फर्जी निस्तारण और भ्रष्टाचार के आरोप, डीएम ने दिए जांच के आदेश
आगरा। तहसील सदर में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादियों का गुस्सा प्रशासन के सामने खुलकर दिखाई दिया। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे, फर्जी तरीके से शिकायतों का निस्तारण, जलभराव, नगर निगम की लापरवाही और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों ने जिलाधिकारी मनीष बंसल के सामने जमकर शिकायतें रखीं। कई फरियादियों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि कागजों में फर्जी निस्तारण कर मामले बंद कर दिए गए।
‘डीएम साहब, सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं हट रहा’
जारूआ कटरा निवासी नरेश कुमार, राजेंद्र सिंह और आधार सिंह ने डीएम को बताया कि चकरोड संख्या 1419 और नाली संख्या 1420 पर लंबे समय से अवैध कब्जा है। इस संबंध में तीन से चार बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कब्जा हटाने के बजाय अधिकारियों ने फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निस्तारण दिखा दिया। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं कुशवाहा समाज पंचायती बगीची के अध्यक्ष रामरूप ने खंदारी रोड स्थित पंचायती भवन की भूमि पर कब्जे की शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की। दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए डीएम मनीष बंसल ने जांच के आदेश दिए।
डीएम बोले—लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
शिकायतें सुनने के बाद डीएम मनीष बंसल ने स्पष्ट कहा कि जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करें। साथ ही लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
जलभराव और सफाई व्यवस्था पर भी उठे सवाल
सिकंदरा निवासी रमेश कुमार ने कहा कि नालियों और नालों पर अवैध कब्जे हटाकर नियमित सफाई कराई जाए, जिससे थोड़ी सी बारिश में होने वाले जलभराव से लोगों को राहत मिल सके। वहीं ब्रह्मनगर निवासी सुधीर कुमार ने बताया कि उनकी माता का वर्ष 2018 में निधन हो गया था। उन्होंने एक माह पहले मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया।
139 शिकायतें पहुंचीं, सिर्फ 19 का मौके पर निस्तारण
संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 139 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से मात्र 19 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया जा सका। सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग (42) और पुलिस विभाग (28) से संबंधित रहीं। इसके अलावा नगर निगम, एडीए, टोरेंट पावर सहित अन्य विभागों से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं।
‘साहब, मैं जिंदा हूं… लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मुझे मृत घोषित कर दिया’
संपूर्ण समाधान दिवस में सबसे चौंकाने वाला मामला फतेहाबाद तहसील से सामने आया। 70 वर्षीय परसादी, निवासी ताजगंज, अधिकारियों के सामने पहुंचे और कहा, “साहब, मैं जिंदा हूं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मुझे मृत दिखाकर मेरी पुश्तैनी जमीन हड़प ली गई।”
परसादी ने बताया कि करीब 38 वर्ष पहले पारिवारिक विवाद के चलते वह दिल्ली और बाद में लुधियाना चले गए थे। वर्षों बाद गांव लौटने पर पता चला कि राजस्व अभिलेखों में उन्हें मृत दर्शाकर उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि में दूसरे लोगों के नाम वारिस दर्ज कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई और उनकी जमीन हड़पने की साजिश रची गई। मामला सुनकर अधिकारी भी हैरान रह गए। तहसीलदार शिखर मिश्रा ने पूरे प्रकरण की जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रशासन के सामने व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
संपूर्ण समाधान दिवस में सामने आए मामलों ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं शिकायतों का फर्जी निस्तारण, कहीं सरकारी भूमि पर कब्जे, तो कहीं जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर जमीन हड़पने जैसे गंभीर आरोपों ने राजस्व व्यवस्था और शिकायत निस्तारण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना होगा कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद इन मामलों में वास्तविक कार्रवाई होती है या फिर शिकायतें एक बार फिर सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जाती हैं। इस दौरान सीडीओ प्रतिभा सिंह, डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास, तहसीलदार सत्येंद्र कुमार सिंह, नायब तहसीलदार प्रियंका चौधरी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।