आगरा। सुभाष बाजार हादसे के बाद भी लगता है कि आगरा नगर निगम ने कोई सबक नहीं लिया। शहर के नगला पेमा क्षेत्र में नगर निगम की लापरवाही एक बार फिर लोगों की जान पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। यहां करीब तीन महीने से सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, और बरसात शुरू होते ही सड़क किनारे की मिट्टी धंसने लगी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि एक मकान अब गिरने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे आसपास रहने वाले परिवार दहशत में हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से सड़क निर्माण का ठेका दिए जाने के बाद ठेकेदार ने पुरानी सड़क और किनारे का हिस्सा खोद दिया, लेकिन निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं कराया। बरसात आते ही मिट्टी पूरी तरह बैठने लगी और अब मकान की नींव तक खतरा पहुंच गया है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार ठेकेदार को संभावित हादसे की जानकारी दी, लेकिन उसने गंभीरता दिखाने के बजाय कथित तौर पर कहा, “मैं अपने हिसाब से काम करूंगा, मकान गिरता है तो मैं क्या करूं।” इस कथित बयान के बाद लोगों में नगर निगम और ठेकेदार दोनों के प्रति भारी नाराजगी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर निगम के इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर और संबंधित अधिकारी कहां हैं? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है? यदि सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मिट्टी को मजबूत नहीं किया गया और निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया, तो किसी भी समय मकान भरभराकर गिर सकता है। यदि उस समय कोई बड़ा हादसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्षेत्रवासियों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण कराने, प्रभावित मकान को सुरक्षित कराने, सड़क निर्माण कार्य तुरंत पूरा कराने तथा लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आगरा नगर निगम किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या लोगों की जान की कीमत केवल हादसे के बाद होने वाली कार्रवाई तक ही सीमित रह गई है? यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे, तो नगला पेमा में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।