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आगरा में 24 घंटे में दो बेटियां बनीं ‘ऑनर किलिंग’ का शिकार

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एक ने की थी कोर्ट मैरिज, दूसरी थी गर्भवती; झूठी आन-बान की खातिर पिता बने जल्लाद

आगरा।

ताजनगरी में महज 24 घंटे के भीतर सामने आईं दो कथित ऑनर किलिंग की घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। एक मामले में बेटी का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने परिवार की मर्जी के खिलाफ कोर्ट मैरिज कर ली थी, जबकि दूसरे मामले में अविवाहित बेटी के गर्भवती होने की जानकारी मिलने पर पिता ने उसे मौत के घाट उतार दिया। दोनों मामलों में आरोप अपने ही पिता पर है। पहली घटना में मां पर भी हत्या में साथ देने का आरोप है, जबकि दूसरी घटना में दामाद को भी साजिश में शामिल बताया गया है।

पहला मामला : कोर्ट मैरिज बनी मौत की वजह

जैतपुर थाना क्षेत्र के नंदगवा रोड स्थित प्रताप नगर निवासी अंकिता शर्मा ने इसी वर्ष 23 फरवरी को आईटीबीपी के जवान अमित उर्फ अनिल से परिवार की मर्जी के बिना कोर्ट मैरिज की थी। शादी के बाद पति ड्यूटी पर चला गया, जबकि अंकिता अपने मायके में ही रह रही थी। पुलिस के अनुसार, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया और परिचितों के जरिए परिवार को कोर्ट मैरिज की जानकारी हुई। इसके बाद घर में लगातार विवाद होने लगा। रविवार देर रात अंकिता की हत्या कर दी गई। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार पिता विमल शर्मा ने स्वीकार किया कि उसने बेटी के गले में पहले रस्सी और फिर दुपट्टे का फंदा कस दिया। जब अंकिता चीखने लगी तो उसकी मां सीता देवी ने मुंह दबाकर चीखें रोक दीं। कुछ ही देर में अंकिता की मौत हो गई। हत्या के बाद मां घर के पीछे से फरार हो गई।

रात करीब साढ़े 12 बजे पड़ोसियों ने चीखें सुनीं। करीब 20 लोग घर के बाहर पहुंचे और दरवाजा पीटते रहे, लेकिन किसी ने नहीं खोला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा खुलवाया तो छत पर बने कमरे में तख्त पर अंकिता का शव पड़ा मिला। उसके गले में रस्सी और दुपट्टे का फंदा था। पुलिस ने मौके से पिता को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मां और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

दूसरा मामला : गर्भवती बेटी को चंबल में डुबोकर मार डाला

जैतपुर की घटना के अगले ही दिन बासौनी थाना क्षेत्र से एक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। दिल्ली के तिगड़ी थाना क्षेत्र में रहने वाला लखपत सिंह बघेल मूल रूप से बासौनी के लखनपुरा गांव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, उसे पता चला कि उसकी 18 वर्षीय अविवाहित बेटी गर्भवती है। समाज में बदनामी के डर से उसने बेटी की हत्या की योजना बनाई।

आरोप है कि वह अपने दामाद सुनील के साथ बेटी को बहाने से दिल्ली से गांव लेकर आया। अगले दिन सुबह चंबल नदी किनारे ले जाकर पहले उसे खुद नदी में डूबकर जान देने के लिए कहा। जब वह ऐसा नहीं कर सकी तो पिता ने कथित रूप से उसे नदी के बीच ले जाकर डुबो दिया।

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि बेटी पानी से बाहर निकलने की कोशिश करती रही, लेकिन उसने उसे बचने नहीं दिया। इसके बाद उसने बेटी की कुछ तस्वीरें खींचीं, ताकि बाद में लोगों को यह विश्वास दिलाया जा सके कि उसकी मौत नदी में डूबने से हुई है।

दिल्ली लौटने के बाद उसने पड़ोसियों को भी यही कहानी सुनाई, लेकिन एक युवक को संदेह हुआ और उसने पुलिस को सूचना दे दी। जांच के दौरान आरोपी ने हत्या करना स्वीकार कर लिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस आरोपी पिता और उसके दामाद को रिमांड पर लेकर आगरा पहुंची है। स्थानीय पुलिस और गोताखोर चंबल नदी में युवती के शव की तलाश कर रहे हैं।

दो घटनाएं… एक जैसी सोच

दोनों घटनाओं के कारण अलग थे, लेकिन मानसिकता एक जैसी दिखाई दी। एक बेटी ने अपनी पसंद से जीवनसाथी चुना तो दूसरी अपनी निजी जिंदगी के कारण परिवार के निशाने पर आ गई। दोनों मामलों में कथित पारिवारिक सम्मान और सामाजिक बदनामी का हवाला देकर बेटियों की जान ले ली गई।

जैतपुर मामले में पुलिस पिता को जेल भेज चुकी है और मां सहित अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। वहीं बासौनी मामले में दिल्ली पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। चंबल नदी में युवती के शव की तलाश जारी है। दोनों मामलों की जांच में स्थानीय और दिल्ली पुलिस जुटी हुई हैं।

आगरा में 24 घंटे के भीतर सामने आई इन दो घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इक्कीसवीं सदी में भी बेटियों की पसंद, उनकी इच्छा और उनकी जिंदगी पर परिवार के तथाकथित सम्मान का बोझ कब तक भारी पड़ता रहेगा।

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