बिना नंबर प्लेट के हो रही थी ढुलाई, पुलिस ने वाहन खाद्य एवं रसद विभाग को सौंपा, कालाबाजारी के नेटवर्क की जांच शुरू
खैरागढ़। केंद्र और प्रदेश सरकार गरीब एवं पात्र परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है, ताकि किसी भी जरूरतमंद परिवार को भूखा न रहना पड़े। इसके लिए सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद सरकारी राशन की कालाबाजारी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। खैरागढ़ क्षेत्र में मंगलवार सुबह हुई कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी राशन की अवैध खरीद-फरोख्त को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
थाना खैरागढ़ पुलिस ने गश्त के दौरान सरकारी चावल से लदी एक संदिग्ध मैक्स गाड़ी को पकड़ लिया। पुलिस को देखते ही चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने जब वाहन की तलाशी ली तो उसमें बड़ी मात्रा में सरकारी चावल लदा मिला। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वाहन पर आगे और पीछे कहीं भी नंबर प्लेट नहीं लगी थी। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई के बाद खाद्य एवं रसद विभाग को सौंप दिया। अब खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है, उसमें लदा सरकारी चावल किस गोदाम, उचित दर विक्रेता अथवा अन्य स्रोत से आया और उसे किस स्थान पर ले जाया जा रहा था। वाहन के इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर उसके स्वामित्व की जानकारी जुटाई जा रही है।
गांव-गांव सक्रिय बताए जाते हैं दलाल
क्षेत्र में लंबे समय से यह चर्चा है कि कुछ दलाल गांवों और गली-मोहल्लों में पहुंचकर गरीब परिवारों से सरकारी चावल नकद रुपये देकर खरीद लेते हैं। आर्थिक तंगी या अन्य कारणों से कुछ लोग अपना राशन बेच देते हैं। इसके बाद यही चावल खुले बाजार या दूसरे राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता है। यदि ऐसा होता है तो इससे सरकार की जनकल्याणकारी योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है और जरूरतमंद परिवारों का हक भी प्रभावित हो सकता है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि बरामद चावल सरकारी वितरण प्रणाली का है या नहीं और इसकी ढुलाई किस उद्देश्य से की जा रही थी। यदि जांच में सरकारी राशन की अवैध खरीद-फरोख्त या कालाबाजारी की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि फरार चालक की पहचान करने का भी प्रयास किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा कि यह सिर्फ संदिग्ध ढुलाई का मामला है या इसके पीछे सरकारी राशन की कालाबाजारी का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है।