आगरा।
सदर क्षेत्र स्थित नंद प्लाजा में कैफे और मिनी प्लेक्स पर हुई छापेमार कार्रवाई के बाद अब मामला सिर्फ अवैध केबिनों तक सीमित नहीं रह गया है। पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस महकमे में उस गोपनीय रिपोर्ट को लेकर हलचल मची हुई है, जिसे स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) ने पुलिस आयुक्त को भेजा है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि क्षेत्र में लंबे समय से चल रही अवैध गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिलने के संकेत हैं। यदि रिपोर्ट के निष्कर्षों की पुष्टि होती है तो विभागीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
बताया जा रहा है कि गुरुवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस आयुक्त को दी। इस दौरान यह भी बताया गया कि सौदागर लाइन चौकी स्तर से पहले भी केबिन बंद कराने के प्रयास किए गए थे और संबंधित संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, इसके बाद कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ सकी, यही अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है। सूत्रों के अनुसार, चौकी स्तर पर जारी किए गए नोटिस भी पुलिस आयुक्त को दिखाए गए, जिन्हें देखने के बाद उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
सूत्रों का कहना है कि यदि LIU की यह रिपोर्ट शासन स्तर तक पहुंचकर गंभीरता से परीक्षण में सही पाई जाती है, तो केवल कैफे संचालक ही नहीं बल्कि लापरवाही या कथित संरक्षण के आरोपों में कुछ पुलिस कर्मियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है। यही वजह है कि पुलिस महकमे में इस रिपोर्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
आठ साल तक चलता रहा केबिनों का खेल, अब उठ रहे कई सवाल
जानकारी के अनुसार नंद प्लाजा में सबसे पहले वर्ष 2018 के आसपास बरिस्ता कैफे में केबिन बनाए गए थे। इसके बाद आसपास के अन्य कैफे और मिनी प्लेक्स में भी इसी तरह के बंद केबिन तैयार कर दिए गए। आरोप है कि इन केबिनों को घंटों के हिसाब से किराए पर दिया जाता था और कई स्थानों पर आने वाले लोगों से पहचान पत्र तक नहीं मांगा जाता था। अब सवाल उठ रहा है कि यदि यह व्यवस्था वर्षों से संचालित थी तो संबंधित विभागों की नजर इस पर पहले क्यों नहीं गई।
रिसेप्शन पर युवतियां, एडवांस भुगतान और केबिन तक एंट्री
पुलिस जांच में सामने आया है कि कई कैफे और मिनी प्लेक्स में रिसेप्शन पर युवतियों को तैनात किया गया था। जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, ग्राहकों से पहले एडवांस भुगतान लिया जाता था और उसके बाद उन्हें केबिन तक पहुंचाया जाता था। पुलिस ने वहां कार्यरत युवतियों के बयान भी दर्ज किए हैं। उनके अनुसार वे मासिक वेतन पर नौकरी कर रही थीं। इन बयानों के आधार पर भी पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
क्या अब दूसरे केबिनों तक भी पहुंचेगी जांच?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सदर क्षेत्र में केवल नंद प्लाजा ही ऐसा स्थान नहीं है, जहां इस तरह के केबिन संचालित होने की चर्चा रही हो। क्षेत्र के अन्य कैफे और प्रतिष्ठानों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब लोगों की निगाह इस बात पर है कि पुलिस की कार्रवाई केवल एक परिसर तक सीमित रहेगी या पूरे इलाके में ऐसे प्रतिष्ठानों की व्यापक जांच की जाएगी।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। LIU की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई क्या होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।