खेरिया मोड़ से एयरपोर्ट तक जलभराव, मुख्यमंत्री के आगमन वाले मार्ग की बदहाली पर उठे सवाल; स्थानीय लोगों ने कहा—होर्डिंगों में विकास दिखता है, जमीन पर नहीं…
आगरा।
बुधवार की बारिश ने एक बार फिर शहर में विकास के दावों की हकीकत सामने ला दी। खेरिया मोड़ से एयरपोर्ट तक जाने वाला वीआईपी मार्ग कई स्थानों पर जलभराव की चपेट में आ गया। सड़क पर इतना पानी भर गया कि दोपहिया वाहन रेंगते नजर आए, चार पहिया वाहनों की रफ्तार थम गई और एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह वही मार्ग है, जिससे अक्सर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई वीआईपी शहर में प्रवेश करते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाल तस्वीरों ने एक बार फिर विकास कार्यों की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह इलाका राजनीतिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, लोकसभा सांसद, विधायक, महापौर, पार्षद और भाजपा संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी करते हैं। इसके बावजूद हर मानसून में एयरपोर्ट रोड से लेकर आसपास की कॉलोनियों तक जलभराव की तस्वीरें सामने आना स्थानीय लोगों में नाराजगी का कारण बन रहा है।
बारिश थमने के बाद भी सड़क पर लंबे समय तक पानी जमा रहा। कई वाहन बीच रास्ते में धीमे पड़ गए और राहगीरों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। हर साल बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये विकास और सड़क निर्माण पर खर्च होने के बावजूद यदि शहर का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग ही जलमग्न हो जाए तो योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुख्यमंत्री या किसी बड़े नेता के आगमन से पहले पूरे मार्ग को सजाया जाता है। जगह-जगह बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए जाते हैं, स्वागत द्वार बनते हैं और विकास के दावे किए जाते हैं। लेकिन बारिश होते ही वही सड़कें पानी में डूब जाती हैं और आसपास की कॉलोनियां जलभराव से जूझने लगती हैं। लोगों का कहना है कि यदि विकास का वास्तविक आकलन करना है तो बारिश के बाद शहर की सड़कों और बस्तियों की स्थिति देखी जानी चाहिए।
लोगों का कहना है कि शहर में नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और ड्रेनेज सिस्टम पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति अलग नजर आती है। उनका आरोप है कि बारिश शुरू होते ही कई सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं और कॉलोनियों में पानी भर जाता है। इससे लोगों का आवागमन प्रभावित होता है और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।
बारिश के बाद एयरपोर्ट रोड की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि शहर की पहचान और वीआईपी मार्ग का यह हाल है तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। नागरिकों का कहना है कि अब केवल घोषणाएं, शिलान्यास और प्रचार नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम, जलकल विभाग और संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि जलभराव वाले स्थानों का तकनीकी सर्वे कराया जाए, ड्रेनेज व्यवस्था को नए सिरे से विकसित किया जाए और बरसात से पहले नालों की प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि हर वर्ष एक जैसी स्थिति बनने के बाद भी यदि समस्या जस की तस बनी रहती है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बारिश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब एक ही क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री, कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक, महापौर, पार्षद और भाजपा संगठन के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद हैं, तब भी शहर के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल एयरपोर्ट रोड और आसपास के क्षेत्रों को जलभराव से स्थायी राहत क्यों नहीं मिल पा रही है। नागरिकों का कहना है कि विकास का सही पैमाना बड़े-बड़े होर्डिंग नहीं, बल्कि ऐसी बुनियादी सुविधाएं हैं जो हर मौसम में लोगों को राहत दें।