आगरा।
शहर के सदर क्षेत्र स्थित नंद प्लाजा में कैफे और मिनी मूवी स्टेशन की आड़ में कथित तौर पर ऐसा कारोबार संचालित हो रहा था, जहां युवक-युवतियों को बंद और अंधेरे प्राइवेट केबिन घंटे के हिसाब से उपलब्ध कराए जाते थे। बाहर से यह प्रतिष्ठान सामान्य कैफे दिखाई देते थे, लेकिन अंदर का नजारा बिल्कुल अलग था। सामने कॉफी और स्नैक्स परोसने की व्यवस्था थी, जबकि पीछे बंद दरवाजों वाले निजी केबिन बनाए गए थे। इन्हीं केबिनों को कथित तौर पर तय समय के लिए किराए पर दिया जाता था। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) को लगातार शिकायतें मिलने के बाद गोपनीय जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों तक पहुंची तो बुधवार दोपहर संयुक्त टीम ने नंद प्लाजा में एक साथ कई प्रतिष्ठानों पर छापा मार दिया। कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई कि किसी संचालक को भनक तक नहीं लगी।
बताया जाता है कि पुलिस पहले से ही पूरे इलाके की घेराबंदी कर चुकी थी। टेंपो ट्रैवलर और पर्याप्त पुलिस बल के साथ टीमें अलग-अलग हिस्सों में बांटी गईं और एक ही समय में कई कैफे तथा मिनी मूवी स्टेशन में दबिश दी गई। पुलिस जैसे ही बंद केबिनों तक पहुंची, वहां अंधेरा मिला। लाइट जलाकर दरवाजे खुलवाए गए तो अंदर मौजूद युवक-युवतियों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस को सामने देखकर कई युवतियां घबरा गईं और मौके पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं। वे महिला पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर अपने परिजनों को सूचना न देने की गुहार लगाती रहीं। उनका कहना था कि यदि घरवालों को इस घटना का पता चला तो वे उन्हें घर से बाहर निकलने तक नहीं देंगे। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें अलग ले जाकर पूछताछ की।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि कुछ युवतियां कॉलेज, कोचिंग या अन्य काम का बहाना बनाकर घर से निकली थीं। पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 11 प्रेमी जोड़ों और तीन संचालकों को हिरासत में लिया। संबंधित प्रतिष्ठानों के रिकॉर्ड, लाइसेंस और संचालन संबंधी दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। जिन कैफे और मिनी मूवी स्टेशन में अनियमितताएं मिलीं, उन्हें सील कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद शहर में संचालित ऐसे अन्य कैफे और मिनी मूवी स्टेशन भी चर्चा में आ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई स्थानों पर छोटे-छोटे बंद केबिन वाले कैफे खुल गए हैं, जहां सामान्य कैफे की तुलना में अलग तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अब लोगों की मांग है कि केवल एक परिसर तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि पूरे शहर में ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच कराई जाए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस नंद प्लाजा में कथित तौर पर लंबे समय से यह व्यवस्था चल रही थी, वहां तक एलआईयू की गोपनीय सूचना पहुंच गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इस प्रश्न पर भी शहरभर में चर्चा है। हालांकि इस संबंध में पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
फिलहाल नंद प्लाजा की कार्रवाई ने शहर में कैफे और मिनी मूवी स्टेशन के संचालन, सुरक्षा मानकों और नियमों के पालन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रशासन शहर के अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों की भी व्यापक जांच करेगा और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिलता है तो क्या वहां भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
LIU को मिल गई भनक, लेकिन सदर थाना पुलिस क्यों रही अनजान? कार्रवाई के बाद उठे कई बड़े सवाल…
आगरा। सदर स्थित नंद प्लाजा में कैफे और मिनी मूवी स्टेशन की आड़ में कथित तौर पर लंबे समय से बंद केबिनों का संचालन हो रहा था। एलआईयू की गोपनीय सूचना पर बुधवार को संयुक्त पुलिस टीम ने छापा मारकर 11 प्रेमी जोड़ों और तीन संचालकों को हिरासत में लिया। कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल स्थानीय थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है।
नंद प्लाजा शहर के व्यस्त इलाके में स्थित है। सदर थाना और एसीपी कार्यालय भी यहां से अधिक दूरी पर नहीं हैं। इसके बावजूद यदि यहां लंबे समय से इस तरह की गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? आखिर ऐसी क्या वजह रही कि कार्रवाई एलआईयू की सूचना पर करनी पड़ी? स्थानीय लोगों का कहना है कि नंद प्लाजा में एक-दो नहीं, बल्कि कई कैफे संचालित हो रहे थे। सुबह से देर शाम तक युवक-युवतियों की आवाजाही बनी रहती थी। लोगों के अनुसार यह स्थिति नई नहीं थी, बल्कि काफी समय से चर्चा का विषय थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि आम लोगों के बीच इसकी चर्चा थी तो स्थानीय पुलिस तक सूचना क्यों नहीं पहुंची या उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इलाके के व्यापारियों का कहना है कि पुलिस नो-पार्किंग में खड़े वाहनों पर तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन यदि किसी व्यावसायिक परिसर में लंबे समय से नियमों के विपरीत गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं तो उन पर पहले सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई? इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि नंद प्लाजा अकेला ऐसा परिसर नहीं है। सदर बाजार समेत शहर के कई इलाकों में बंद केबिन वाले कैफे और मिनी मूवी स्टेशन संचालित होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं। अब लोगों की मांग है कि पुलिस केवल एक परिसर तक कार्रवाई सीमित न रखे, बल्कि पूरे शहर में अभियान चलाकर ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच करे।
ताजनगरी में इस तरह का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2004 में संजय प्लेस स्थित एक साइबर कैफे पर पुलिस ने छापा मारकर बंद केबिनों से दो दर्जन से अधिक युवक-युवतियों को पकड़ा था। उस समय स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि साइबर कैफे में बंद केबिन नहीं बनाए जाएंगे। समय के साथ साइबर कैफे की जगह ई-लाइब्रेरी, कैफे और मिनी मूवी स्टेशन ने ले ली, लेकिन अब फिर उसी तरह की व्यवस्था सामने आने से पुराने सवाल फिर खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार अतीत में कुछ कैफे संचालकों को नियमों के पालन के संबंध में चेतावनी और नोटिस भी दिए गए थे। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि यदि शिकायतें और चेतावनियां पहले से थीं, तो प्रभावी कार्रवाई समय रहते क्यों नहीं की गई? फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है—जब एलआईयू तक सूचना पहुंच गई, तो स्थानीय थाना पुलिस पहले क्यों सक्रिय नहीं हुई? इस सवाल का जवाब आने वाली जांच और विभागीय समीक्षा से ही सामने आएगा।