कमला नगर, एमजी रोड और हाईवे पर दो फीट तक पानी; सुल्तानगंज पुलिया से वीआइपी रोड तक घंटों जाम, पंप और ‘मिशन-24’ के दावे भी बेअसर
आगरा।
ताजनगरी में बारिश की पहली तेज बौछार ने शहर की ‘स्मार्ट’ व्यवस्था की हकीकत सड़क पर ला दी। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों और जलभराव से निपटने के दावों के बीच कमला नगर, एमजी रोड, सिकंदरा-रामबाग और खेरिया मोड़ की वीआइपी रोड समेत शहर के 30 से अधिक इलाकों में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर गया। सड़कें जलमग्न हुईं तो वाहन पानी में फंस गए और कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
सुल्तानगंज पुलिया पर हालात सबसे ज्यादा बिगड़े। पानी भरने के साथ यहां वाहनों की रफ्तार थम गई और घंटों जाम से लोग जूझते रहे। कुबेरपुर और टेढ़ी बगिया में भी यातायात प्रभावित रहा। टेढ़ी बगिया में चल रहे सीएम ग्रिड के कार्य ने बारिश के बाद परेशानी और बढ़ा दी।
पंप और वादे भी पानी में डूबे
मानसून से पहले नगर निगम की ओर से नालों की सफाई और जलभराव से निपटने के लिए 72 घंटे के नाला सफाई अभियान और पंपों की व्यवस्था के दावे किए गए थे। लेकिन बारिश के बाद जिस तरह शहर के बड़े हिस्से जलमग्न हुए, उसने इन तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मानसून से पहले करोड़ों रुपये खर्च कर नालों और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे किए गए थे, तो पहली तेज बारिश में शहर की सड़कें तालाब क्यों बन गईं?
कहीं सड़क जलमग्न तो कहीं 10 फीट का गड्ढा
कमला नगर के कर्मयोगी एन्क्लेव में सड़क पर करीब 10 फीट गहरा गड्ढा बनने से खतरा और बढ़ गया। वहीं एमजी रोड और कमला नगर हाईवे पर करीब दो फीट पानी भरने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
खेरिया मोड़ की वीआइपी रोड पर जलभराव ने एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए। सिकंदरा-रामबाग क्षेत्र में भी बारिश के बाद सड़कें पानी में डूबी नजर आईं।
करदाताओं के पैसे का हिसाब कौन देगा?
शहर में लगातार हो रहे सड़क, नाला और जलनिकासी के कार्यों के बावजूद यदि बारिश होते ही सड़कें जलमग्न हो जाएं और लोग घंटों जाम में फंसें, तो सवाल उठना लाजिमी है। आखिर हर साल जलभराव के नाम पर होने वाले खर्च का असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई देता?
बारिश ने नगर निगम और संबंधित विभागों के सामने एक बार फिर चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि अगली बारिश से पहले जलभराव वाले स्थानों की समस्या दूर होती है या फिर ‘स्मार्ट सिटी’ के दावे एक बार फिर पानी में बहते नजर आएंगे।