आगरा।
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और भारत निर्वाचन आयोग दुनिया की सबसे बड़ी चुनाव प्रबंधन संस्था है। लगभग 95 करोड़ मतदाताओं वाले देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने, तथ्यों पर विश्वास करने और प्रत्येक पात्र मतदाता से मतदान अवश्य करने का आह्वान किया।
बुधवार को वाटरवर्क्स चौराहा स्थित अग्रवन में आयोजित नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स उत्तर प्रदेश के 78वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्य निर्वाचन आयुक्त का भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपनी धर्मपत्नी के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।
अपने प्रेरक संबोधन में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग केवल चुनाव कराने वाली संस्था नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता और जनविश्वास का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग के अधीन लगभग 1.80 करोड़ अधिकारी एवं कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया को सफल बनाने में जुटते हैं। इतने विशाल स्तर पर चुनाव का संचालन विश्व में अपनी तरह का अद्वितीय उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने ईसीआई नेट (ECI NET) प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसमें चुनाव संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बन रही है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि भारत में चुनाव केवल संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम तथा भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित नियमों के अनुसार ही कराए जाते हैं। मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले राजनीतिक दलों की सहभागिता से उसका परीक्षण किया जाता है। मतदान से पहले प्रत्येक मतदान केंद्र पर मॉक पोल कराया जाता है और प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंट पूरी प्रक्रिया के साक्षी रहते हैं। इसी प्रकार मतगणना भी काउंटिंग एजेंटों की मौजूदगी में निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न होती है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती का सबसे बड़ा संकेतक मतदान प्रतिशत होता है। विभिन्न राज्यों में लगातार बढ़ रही मतदाता भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि देश का नागरिक लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग और प्रतिबद्ध है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट, अनुपस्थित तथा विदेशी व्यक्तियों के नामों की पहचान कर सूची को अद्यतन किया जाता है, ताकि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और विभिन्न नैरेटिव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती अफवाहों से नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था, पारदर्शिता और तथ्यात्मक जानकारी से होती है। नागरिकों को केवल प्रमाणिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
अपने संबोधन के दौरान ज्ञानेश कुमार ने अपने छात्र जीवन का प्रेरक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1985 में आईआईटी कानपुर से शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें अमेरिका के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति मिली थी, लेकिन अपनी माता की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने विदेश न जाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि वही निर्णय उनके सार्वजनिक जीवन की दिशा तय करने वाला साबित हुआ और आज उन्हें देश की सेवा करने का सौभाग्य मिला है।
आगरा के विकास पर चर्चा करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि शहर के उद्योगपति, उद्यमी और सामाजिक संगठन आगरा को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रशासन और उद्योग जगत की साझेदारी से शहर के समग्र विकास को नई गति मिल रही है।
समारोह में नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के पदाधिकारियों एवं सदस्यों सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से मनोज कुमार बंसल, नितेश अग्रवाल, अंबा प्रसाद गर्ग, विनय मित्तल, अनिल गर्ग, मनीष अग्रवाल और केशव दत्त गुप्ता मौजूद रहे। लोकतंत्र की शक्ति और मतदाता की भूमिका पर केंद्रित मुख्य निर्वाचन आयुक्त का यह संबोधन न केवल चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता का संदेश था, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य के प्रति जागरूक करने का भी प्रभावी प्रयास रहा।