आगरा। जनपद में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ और जवाबदेह बनाने के लिए प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। मंगलवार को नगर निगम के स्मार्ट सिटी सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 पर क्षमता संवर्धन कार्यशाला आयोजित की गई। बैठक में नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन, बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान, अवैध डंपिंग पर रोक और ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद के सभी संबंधित विभाग अगले 15 दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्र के बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) की सूची तैयार करें। इसमें बड़े होटल, अस्पताल, शिक्षण संस्थान, उद्योग, मॉल, मल्टीप्लेक्स, मैरिज होम, सरकारी कार्यालय, आवासीय परिसर और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सभी चिन्हित संस्थानों को नए नियमों की जानकारी देकर उनका ऑनलाइन पंजीकरण सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं रहेगा, बल्कि सभी विभागों, स्थानीय निकायों, सेवा प्रदाताओं और नागरिकों को भी इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 का प्रत्येक स्तर पर शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि नई नियमावली के तहत पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। अब ग्राम पंचायतें और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बड़े कचरा उत्पादक भी इन नियमों के दायरे में आएंगे। जिन संस्थानों का क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या अधिक जल उपयोग अथवा 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा प्रतिदिन उत्पन्न होता है, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा गया है। कार्यशाला में नगर निगम के मुख्य अभियंता (पर्यावरण) पंकज भूषण ने नए नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जनपद स्तर पर विशेष सेल का गठन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि आगरा में अब तक करीब 20 लाख मीट्रिक टन पुराने डंपिंग वेस्ट का निस्तारण किया जा चुका है। शेष डंपिंग स्थलों की पहचान कर उनका भी शीघ्र निस्तारण कराया जाएगा तथा इसकी नियमित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि अब ठोस कचरे का चार स्तरों पर पृथक्करण अनिवार्य होगा। गीला कचरा, सूखा कचरा, स्वच्छता संबंधी कचरा और विशेष श्रेणी के कचरे को अलग-अलग एकत्र करना होगा। बड़े कचरा उत्पादकों को अपने परिसर में जैविक कचरे का कम्पोस्टिंग अथवा अन्य स्वीकृत तकनीकों से निस्तारण करना होगा। साथ ही शेष कचरा अधिकृत एजेंसियों को उपलब्ध कराना होगा। नए नियमों के तहत एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित किया गया है, जिस पर अपशिष्ट संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, कम्पोस्ट उत्पादन, बायो-माइनिंग और वार्षिक रिपोर्ट का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों को पोर्टल पर पंजीकरण कर प्रत्येक वित्तीय वर्ष का वार्षिक रिटर्न ऑनलाइन जमा करना होगा। पोर्टल के माध्यम से जारी होने वाला बीडब्ल्यूजी प्रमाणपत्र भविष्य में उद्योगों, होटलों और अन्य संस्थानों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज होगा।
जिलाधिकारी ने सभी ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों और नगर निकायों को निर्देश दिए कि वे 15 दिनों के भीतर अपने क्षेत्रों के सभी डंपिंग स्थलों और अनधिकृत कूड़ा निस्तारण स्थलों की पहचान कर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि आगरा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिहाज से संवेदनशील जनपद है, इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से नियमों का पालन सुनिश्चित करें। जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को भी कचरा पृथक्करण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए। कार्यशाला में नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य, पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अमित मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सेवा प्रदाता संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।