आगरा। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगरा यातायात पुलिस ने सोमवार से 15 दिवसीय विशेष सघन स्कूली वाहन चेकिंग अभियान की शुरुआत कर दी। पुलिस उपायुक्त (यातायात) सोनम कुमार के निर्देशन में 7 जुलाई से 22 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस अभियान के तहत स्कूल बसों, वैन, ईको, ऑटो और अन्य स्कूली वाहनों की व्यापक जांच की जाएगी। अभियान के पहले ही दिन नियमों की अनदेखी करने वाले 34 वाहनों के खिलाफ चालान और सीज की कार्रवाई की गई। यातायात पुलिस ने शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों और स्कूलों के आसपास विशेष चेकिंग अभियान चलाकर कुल 348 स्कूली वाहनों का निरीक्षण किया। इनमें 314 वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि 34 वाहनों में गंभीर कमियां मिलने पर उनके विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई की गई।

चेकिंग के दौरान पुलिस ने वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, आपातकालीन निकास, स्पीड गवर्नर, जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी, फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच की। जिन वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिली, उन्हें मौके पर ही कार्रवाई का सामना करना पड़ा। अभियान के दौरान कई स्कूली वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर परिवहन किए जाने के मामले भी सामने आए। यातायात पुलिस ने इसे बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही मानते हुए ऐसे वाहन संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। इसके अलावा बिना फिटनेस, बिना परमिट और आवश्यक दस्तावेजों के संचालित वाहनों पर भी चालान किए गए।

कार्रवाई के साथ-साथ यातायात पुलिस ने वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया। उन्हें निर्धारित गति सीमा का पालन करने, सीट बेल्ट का अनिवार्य उपयोग करने, वाहन में ओवरलोडिंग न करने, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का प्रयोग न करने तथा सभी यातायात नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए।

पुलिस उपायुक्त (यातायात) सोनम कुमार ने कहा कि यह विशेष अभियान 22 जुलाई तक लगातार शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जारी रहेगा। अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक स्कूली बच्चे की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है, ताकि अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत रह सकें। आगरा पुलिस ने सभी विद्यालय प्रबंधन, वाहन संचालकों और चालकों से अपील की है कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन करें और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
सुरक्षित स्कूली वाहन, सुरक्षित विद्यार्थी — यही सुरक्षित भविष्य की पहली शर्त है।