आगरा। मुख्यमंत्री शहरी सड़क उन्नयन योजना (सीएम ग्रिड) के तहत शहर की प्रमुख सड़कों के निर्माण में हो रही देरी पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को नगर निगम के स्मार्ट सिटी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में कई परियोजनाओं की बेहद धीमी प्रगति सामने आने पर जिलाधिकारी ने निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं हुआ तो जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैठक में मुख्यमंत्री शहरी सड़क उन्नयन योजना के तहत बनाई जा रही शहर की पांच प्रमुख सड़कों की प्रगति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने प्रत्येक परियोजना की लंबाई, स्वीकृत धनराशि, टेंडर प्रक्रिया, अनुबंध की तिथि, कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति तथा निर्माण एजेंसियों से जुड़े सभी बिंदुओं की विस्तार से जानकारी ली।
समीक्षा के दौरान सबसे अधिक नाराजगी हरीपर्वत से रवि हॉस्पिटल और दिल्ली गेट से राजामंडी स्टेशन तक प्रस्तावित 1.25 किलोमीटर सड़क के समेकित विकास कार्य पर जताई गई। बैठक में बताया गया कि परियोजना की भौतिक प्रगति मात्र 15 प्रतिशत है, जबकि ट्रेंचिंग का कार्य भी केवल 16 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित निर्माण एजेंसी श्री राम कंस्ट्रक्शन और कंसल्टेंट फर्म के प्रतिनिधियों को तलब कर कड़ी फटकार लगाई और देरी का कारण पूछा। निर्माण एजेंसी ने पुलिस विभाग से एनओसी मिलने में देरी, अतिक्रमण और भूमिगत यूटिलिटी कार्यों को कारण बताया। इस पर जिलाधिकारी ने किसी भी प्रकार का बहाना स्वीकार करने से इनकार करते हुए मुख्य अभियंता सिविल को निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर तत्काल बाधाएं दूर कराई जाएं। उन्होंने नगर निगम, जलकल, जल निगम और पुलिस विभाग को आपसी समन्वय से काम करते हुए परियोजना को तय समय में पूरा कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद टेढ़ी बगिया से कालिंदी विहार एनएच-19 सर्विस रोड तक 2.88 किलोमीटर सड़क निर्माण की समीक्षा की गई। यहां भी निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति मात्र 10 प्रतिशत पाई गई। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित निर्माण एजेंसी कोणार्क एसोसिएट्स के अधिकारियों को बैठक में बुलाकर जवाब मांगा। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्होंने निर्माण स्थल पर कम मैनपावर लगाए जाने पर नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्माण स्थलों पर पर्याप्त तकनीकी स्टाफ और श्रमिक तैनात किए जाएं। प्रत्येक परियोजना की नियमित निगरानी के लिए नगर निगम के अधिकारियों को नामित किया जाए तथा प्रगति रिपोर्ट प्रतिदिन उपलब्ध कराई जाए। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण कराने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान आम जनता की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग, संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर और सुरक्षा प्रबंध अनिवार्य रूप से लगाए जाएं ताकि दुर्घटनाओं की संभावना समाप्त हो सके। जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो एजेंसियां समय पर और गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करेंगी, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य, मुख्य अभियंता (सिविल) अरविंद श्रीवास्तव, संबंधित निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधि, कंसल्टेंट फर्म तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।